
By Mohamad Mirghahari – इर्रेगुलर वारफेयर सेंटर
अंतिम अद्यतन: जुलाई 2023
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधुनिक अनियमित युद्ध (Irregular Warfare) में सबसे प्रभावशाली उपकरणों में से एक के रूप में उभर रही है। यह विरोधियों को सूचना में हेर-फेर करने, जनमत को प्रभावित करने और यहाँ तक कि अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर करने के तौर-तरीकों को मूल रूप से बदल रही है। डीप फ़ेक से लेकर एल्गोरिदम-संचालित दुष्प्रचार अभियानों तक, AI तीव्र गति से संदेश तैयार करने और अत्यधिक लक्षित प्रभाव कार्रवाइयाँ चलाने में सक्षम है, जो सैन्य व आर्थिक मोर्चों का रुख बदल सकती हैं। इस लंबे तकनीकी ब्लॉग-पोस्ट में हम आरंभिक अवधारणाओं से लेकर उन्नत अनुप्रयोगों तक, अनियमित युद्ध में AI की भूमिका की पड़ताल करेंगे, साथ ही वास्तविक उदाहरण और व्यावहारिक कोड नमूने भी प्रस्तुत करेंगे।
कुंजीशब्द: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनियमित युद्ध, डीप फ़ेक, MILDEC, दुष्प्रचार, साइबर ऑपरेशंस, आर्थिक तोड़-फोड़, जेनरेटिव एडवर्सेरियल नेटवर्क (GAN), डेटा एनालिटिक्स, DoD, सैन्य धोखा-धड़ी, इर्रेगुलर वारफेयर सेंटर
22 मई 2023 की सुबह, पेंटागन में हुए एक विस्फोट की AI-जनित तस्वीर ऑनलाइन तेजी से फैली। इसने सोशल मीडिया पर व्यापक साझा-सामग्री और वित्तीय बाज़ारों में उथल-पुथल पैदा कर दी। यद्यपि तस्वीर जल्दी ही झूठी सिद्ध हो गई, उसकी तात्कालिक प्रभावशीलता गहन थी—एक सशक्त उदाहरण कि किस तरह AI-निर्मित सामग्री को अनियमित युद्ध में हथियार बनाया जा सकता है।
AI कोई साधारण तकनीकी प्रवृत्ति नहीं, बल्कि सूचना-युद्ध का बदलता हुआ प्रतिमान है। दुष्प्रचार व अन्य सैन्य धोखा-धड़ी (MILDEC) के लिए सामग्री रचना व वितरण की इसकी क्षमता ने राज्य एवं गैर-राज्य दोनों अभिनेताओं के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं, जिससे वास्तविकता व गढ़ी गई कहानी में भेद करना कठिन हो गया है।
अनियमित युद्ध उन गैर-पारंपरिक रणनीतियों व तरीकों का विस्तृत समूह है जहाँ विरोधी पारंपरिक सैन्य संरचना का पालन नहीं करते। इसमें मनोवैज्ञानिक, आर्थिक तथा सामाजिक कमजोरियों को निशाना बनाया जाता है और लड़ाकू व नागरिक की रेखा धुंधली हो जाती है।
मुख्य तत्वः
अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) के अनुसार MILDEC वह सामग्री है जिसका उद्देश्य “दुश्मन की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई रोकना, मित्र रक्षात्मक कार्रवाइयों की सफलता बढ़ाना या भविष्य के आक्रामक अभियानों की सफलता सुधारना” है। पहले इसमें नकली टैंक या झूठे आक्रमण-मुक्त बिंदु जैसे भौतिक छल हुए; पर AI ने कम-तकनीकी दुष्प्रचार से लेकर उन्नत डिजिटल छल तक नई परतें जोड़ दी हैं।
AI ने अनेक क्षेत्रों में क्रांति ला दी है और अनियमित युद्ध भी इससे अछूता नहीं। नीचे हम तीन निर्णायक पहलुओं की चर्चा करेंगे जिनसे AI इन अभियानों को प्रभावित करता है।
AI की तीव्र सामग्री-निर्माण व प्रसार क्षमता दुष्प्रचार अभियानों के लिए स्वाभाविक अनुकूल है। यह मानव-श्रम घटाता है और संदेशों को बार-बार व परिष्कृत रूप में लक्षित दर्शकों तक पहुँचाता है।
मुख्य विशेषताएँ:
उदाहरण:
एक निजी नेटवर्क-विज्ञान कंपनी ने पश्चिम अफ्रीकी देश माली में रूस के प्रति धारणा बदलने के लिए 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रभावशाली व्यक्तियों का डेटा AI से विश्लेषित कराया। AI ने 20 सबसे उपयुक्त व्यक्तियों को क्षणों में चुन लिया, दिखाता है कि डेटा एनालिटिक्स किस तरह लक्षित दुष्प्रचार को सूक्ष्म-तौर पर परिमार्जित कर सकता है।
डीप फ़ेक अनियमित युद्ध में AI का सबसे डरावना रूप हैं। इनमें यथार्थ दिखने वाली ऑडियो, वीडियो व चित्रों की नक़ल तैयार होती है, जिससे कभी न हुई घटनाओं का “सबूत” गढ़ा जा सकता है।
कैसे काम करते हैं डीप फ़ेक:
परिणाम:
पेंटागन विस्फोट की झूठी तस्वीर सामने आते ही बाजारों में लगभग 500 अरब डॉलर का पूँजीगत उतार-चढ़ाव आ गया। यह बताता है कि दुष्प्रचार सीधे आर्थिक व सामाजिक अस्थिरता जगा सकता है।
AI सिर्फ जनधारणा ही नहीं, आर्थिक प्रणालियों को भी निशाना बना सकता है। वित्तीय स्थिरता सम्बंधी झूठा नैरेटिव बनाकर यह बाजार घबराहट, ट्रेडिंग-निर्णय और आपूर्ति-श्रृंखला विघटन करा सकता है।
आर्थिक प्रभाव के तंत्रः
22 मई 2023 को पेंटागन में विस्फोट दर्शाती AI-जनित छवि वायरल हुई। जल्दी ही यह झूठी सिद्ध हुई, फिर भी इसने बाजारों व सोशल मीडिया में भारी उथल-पुथल पैदा की।
वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिकी न्यूज़कास्टरों की नकल वाले AI-वीडियो जारी किए ताकि विपक्ष को अस्थिर कर और सरकारी नैरेटिव मज़बूत कर सके। चीन व बुर्किना फासो में भी इसी प्रकार की तकनीक देखी गई है।
AI स्वचालित रूप से सोशल मीडिया व सार्वजनिक स्रोतों से विशाल डेटा एकत्र व विश्लेषित कर कमजोरियाँ खोजता है या दुष्प्रचार के प्रसार को ट्रैक करता है, जिससे रणनीति तुरंत बदली जा सकती है।
नीचे Bash व Python स्क्रिप्ट के उदाहरण दिए हैं, जो नेटवर्क डेटा में पैटर्न स्कैन और आउटपुट पार्स करके निर्णय-निर्माण में सहायक होते हैं।
#!/bin/bash
# नाम: network_scan.sh
# विवरण: यह स्क्रिप्ट nmap से नेटवर्क स्कैन कर खुले पोर्ट पहचानती है जिन्हें विरोधी निशाना बना सकते हैं।
# nmap स्थापित है या नहीं जाँचें
if ! command -v nmap &> /dev/null; then
echo "nmap नहीं मिला। कृपया nmap इंस्टॉल कर पुनः चलाएँ।"
exit 1
fi
# लक्षित IP या रेंज
TARGET="192.168.1.0/24"
echo "नेटवर्क $TARGET पर खुले पोर्ट के लिए स्कैन कर रहे हैं..."
# सर्विस डिटेक्शन व आक्रामक मोड के साथ nmap चलाएँ
nmap -A -T4 $TARGET -oN scan_results.txt
echo "स्कैन पूर्ण। परिणाम scan_results.txt में सहेजे गए हैं।"
#!/usr/bin/env python3
"""
नाम: parse_scan_results.py
विवरण: nmap आउटपुट पार्स कर उन होस्ट्स की सूची देता है जिनके SSH (पोर्ट 22) खुले हैं।
"""
import re
def parse_nmap_output(file_path):
open_ssh_hosts = []
pattern = re.compile(r"Host: (\S+).*Ports:.*22/open")
try:
with open(file_path, 'r') as file:
for line in file:
match = pattern.search(line)
if match:
open_ssh_hosts.append(match.group(1))
except FileNotFoundError:
print(f"{file_path} फ़ाइल नहीं मिली।")
return open_ssh_hosts
def main():
nmap_output = 'scan_results.txt'
hosts = parse_nmap_output(nmap_output)
if hosts:
print("खुले SSH पोर्ट वाले होस्ट्स:")
for h in hosts:
print(f"- {h}")
else:
print("कोई होस्ट SSH के लिए खुला नहीं मिला।")
if __name__ == "__main__":
main()
nmap, सोशल मीडिया सेंटिमेंट व अन्य साइबर खतरा-खुफिया धाराओं से डेटा लेकर मशीन लर्निंग मॉडल लगातार सीखकर खतरे की भविष्यवाणी कर सकते हैं। NLP मॉडल वास्तविक-समय में लाखों पोस्ट छानकर प्रामाणिक बनाम मनगढ़ंत सामग्री वर्गीकृत कर सकते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता निःसंदेह अनियमित युद्ध का सबसे नया व शक्तिशाली हथियार है। विश्वासयोग्य दिखने वाले डीप फ़ेक बनाने से लेकर दुष्प्रचार अभियानों को स्वचालित करने तक, AI ने आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताएँ बढ़ा दी हैं। पेंटागन विस्फोट घटना और अन्य उदाहरण दिखाते हैं कि AI-जनित सामग्री किस तेजी से वित्तीय बाज़ारों, जनमत तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
AI के बढ़ते उपयोग के साथ नैतिक दिशानिर्देश, उन्नत प्रतिरोधी उपाय और सतत प्रशिक्षण अनिवार्य हैं, ताकि यह प्रौद्योगिकी रणनीतिक स्थिरता का साधन बने, अराजकता का नहीं। भविष्य संभवतः प्रतिद्वंद्वी AI प्रणालियों के डिजिटल द्वंद्व द्वारा परिभाषित होगा, इसलिए नीति-निर्माता, रणनीतिकार व तकनीकी विशेषज्ञ सतर्क, लचीले और सहयोगी बने रहें।
यह ब्लॉग-पोस्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनियमित युद्ध के अंतर्संबंध का गहराई से तकनीकी अन्वेषण प्रस्तुत करती है। जैसे-जैसे AI विकसित हो रहा है, इन प्रौद्योगिकियों से आगे रहना राष्ट्रीय सुरक्षा व संचालन-सफलता हेतु अत्यावश्यक है।
अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और किसी संबद्ध संस्था की आधिकारिक नीति या रुख को अनिवार्यतः प्रतिबिंबित नहीं करते।
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